20.2.10

हल्की सी ये
सर्द शाम है
आजा छत पर काटेंगे,
आधा टुकड़ा चाँद उगा है
आधा आधा बांटेगे.
शादी में फिंकते सिक्कों से
बिखरे ये जो तारे हैं
थोडा लड़ के
थोडा मिल के
अपना अपना छाटेंगे.

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